श्री रामायण मन्दिरमाधवबाड़ी, बरेली · विकासनगर, देहरादून
भजन · गीतावली

अवध आजु आगमी एकु आयो

अवध आजु आगमी एकु आयो

राग बिलावल

अवध आजु आगमी एकु आयो |

करतल निरखि कहत सब गुनगन, बहुतन्ह परिचौ पायो ||

बूढ़ो बड़ो प्रमानिक ब्राह्मन सङ्कर नाम सुहायो |

सँग सिसुसिष्य, सुनत कौसल्या भीतर भवन बुलायो ||

पायँ पखारि, पूजि दियो आसन असन बसन पहिरायो |

मेले चरन चारु चार्यो सुत माथे हाथ दिवायो ||

नखसिख बाल बिलोकि बिप्रतनु पुलक, नयन जल छायो |

लै लै गोद कमल-कर निरखत, उर प्रमोद न अमायो ||

जनम प्रसङ्ग कह्यो कौसिक मिस सीय-स्वयम्बर गायो |

राम, भरत, रिपुदवन, लखनको जय सुख सुजस सुनायो ||

तुलसिदास रनिवास रहसबस, भयो सबको मन भायो |

सनमान्यो महिदेव असीसत सानँद सदन सिधायो ||

स्रोत: गीतावली · गोस्वामी तुलसीदास · सार्वजनिक सम्पदा  ·  सम्पूर्ण गीतावली में पढ़ें →