श्री रामायण मन्दिरमाधवबाड़ी, बरेली · विकासनगर, देहरादून
भजन · गीतावली

या सिसुके गुन नाम-बड़ाई

या सिसुके गुन नाम-बड़ाई

राग धनाश्री

या सिसुके गुन नाम-बड़ाई |

को कहि सकै, सुनहु नरपति, श्रीपति समान प्रभुताई ||

जद्यपि बुधि, बय, रुप, सील, गुन समै चारु चार्यो भाई |

तदपि लोक-लोचन-चकोर-ससि राम भगत-सुखदाई ||

सुर, नर, मुनि करि अभय, दनुज हति, हरहि, धरनि गरुआई |

कीरति बिमल बिस्व-अघमोचनि रहिहि सकल जग छाई ||

याके चरन-सरोज कपट तजि जे भजिहै मन लाई |

ते कुल जुगल सहित तरिहैं भव, यह न कछू अधिकाई ||

सुनि गुरबचन पुलक तन दम्पति, हरष न हृदय समाई |

तुलसिदास अवलोकि मातु-मुख प्रभु मनमें मुसुकाई ||

स्रोत: गीतावली · गोस्वामी तुलसीदास · सार्वजनिक सम्पदा  ·  सम्पूर्ण गीतावली में पढ़ें →