श्री रामायण मन्दिरShri Ramayan Mandir — Bareilly | Vikasnagar

एतवार दा लागदा मेला बड़ा बणया है आनन्द, धन बाबा सफाचन्द

छन्द
एतवार दा लागदा मेला बड़ा बणया है आनन्द, धन बाबा सफाचन्द 1. एतवार दा लागदा मेला संगत दूरों-दूरों आवे, फिर आके शीश निवावे, फूल ते बतासे गुरू भेंट तेरी चढ़ावे, मुँह मंगया सो फल पावे। ओ वगदा स्वर्ग जावे, छोड़ मोह माया दे फन्द, धन बाबा सफाचन्द। 2. ओ वगदा स्वर्ग जावे छिन में दूर हो जांदे पाप, तू कृपा करे आप। सिख सेवक माई भाई सब जपदे तेरा जाप, तू सबदा माई बाप। भजन दा प्रताप सारे जग विच सरगन्द, धन बाबा सफाचन्द। 3. भजन दा प्रताप सदा खड़े नी ब्रह्मण्ड, सत दीप चौदह नौ खण्ड। मैं पापी औगुण हारा मेरे सिर पांपां दी पन्ड, दे दर्शन पवे ठन्ड। जागीर तेरी रामटन्ड ओ सबना सी बुलन्द। धन बाबा सफाचन्द। 4. जागीर तेरी रामटन्ड जो नित रवई आबाद,, लोकी पूजदे ने समाध। आसां होन्दी पूरी बाबा जे हर जगह करां याद, हासिल होन्दी मुराद। पर हैंवे पूर्ण सन्त आके झुकदे नी दसवन्त। धन बाबा सफाचन्द। 5. पर हैंवे पूर्ण सन्त पहाड़ां तेरा वास, नित ज्योति तेरी प्रकाश। खार ते बट खेला थाना डेरी तुम्हरे पास, लोकी टेलिया तेरा दास। धन बाबा तुलसीदास जिसने ले उड़ाया कन्द। धन बाबा सफाचन्द। 6. धन बाबा तुलसी दास जिसदा गढ़ी विच मकान, लोकी पूजदा सब जहान। अमृत जैसे जल ब्रह्माजी-विच खड़े सावधान, विच भैरों जी दा स्थान। करदा वी व्याख्यान रामजी नित बणावई छन्द। धत् बाबा सफाचन्द। 7. करदा वी व्याख्यान सिठा बैठ के किनारे, ओ सब दा खिदमतगार ए। तुलसीं सफरीं बाबा जी असी ऐ उचारे, मूढ़ मत मेरी गंवार ए। छोन्दा हर जेहड़ा शहरी बार ओ फिरदा चाक चाबन्द। धन बाबा सफाचन्द।
← जिन्हां सिदक गुरां ते रखया उनानें सब कुछ पाया है।छन्द सूची पर वापस जाएँझगड़ों में दिल न फँसा बाबा; गुण नित दिन कृष्ण के गा बाबा। →