हिमालय के वनों से (भेजा हुआ) एक पत्र।
दिन के पश्चात रात और रात के पश्चात फिर दिन बीते जाना है, और यहां आप का राम कोई काम करने का समय नहीं पाता, कुछ काम न करने में ही वह बहुत लगा रहता है, अति प्रवृत्त है। नेत्रों से अश्रु पात होते रहते हैं, और इस अति वर्षा वाले प्रान्त की वर्षा से यह ठीक बराबरी करता है। रोमांच खड़े हो गए,नेत्र अपने सम्मुख की किसी भी वस्तु का देखते हुये खुले के खुले रह गए। वार्तालाप रुक गया,कार्य रुक गया, दुर्भाग्य से (?) नहीं, बहुत सौभाग्य से। आह! मुझे एकान्त छोड़ दो।
आह प्यारे! इस मूंग के आनन्द की तरंग के पश्चात आनन्द तरंगें कैसी लगातार उमड़ रही हैं।
Let it go on, O the Most delicious pain. Away with writing, Off with lecturing. Out with fame and name. Honours ? Nonsense. Disgrace? meaningless.
अर्थः ऐ अत्यन्त स्वादिष्ट पीड़ा! तू अपने ही होती रहो
इसी के लिये विश्व भ्रमण करता है। और जन्म मरण सब इसी के लिये हैं। पे लो! यह लुढ़कती, विचित्र रूप से उमंडती और लुढ़कती हुई आनन्द की तरंग आ रही है। यह उमड़ता हुआ हंसी रूप मौन छा रहा है।