श्री रामायण मन्दिरमाधवबाड़ी, बरेली · विकासनगर, देहरादून
गुरु भजन

गुर सतिगुर का जो सिखु

मः ४ ॥

गुर सतिगुर का जो सिखु अखाए सु भलके उठि हरि नामु धिआवै ॥

उदमु करे भलके परभाती इसनानु करे अंम्रित सरि नावै ॥

उपदेसि गुरू हरि हरि जपु जापै सभि किलविख पाप दोख लहि जावै ॥

फिरि चड़ै दिवसु गुरबाणी गावै बहदिआ उठदिआ हरि नामु धिआवै ॥

जो सासि गिरासि धिआए मेरा हरि हरि सो गुरसिखु गुरू मनि भावै ॥

जिस नो दइआलु होवै मेरा सुआमी तिसु गुरसिख गुरू उपदेसु सुणावै ॥

जनु नानकु धूड़ि मंगै तिसु गुरसिख की जो आपि जपै अवरह नामु जपावै ॥२॥

स्रोत: पंजाबी गुरु-वाणी · देवनागरी लिप्यंतरण · सार्वजनिक सम्पदा