श्री रामायण मन्दिरमाधवबाड़ी, बरेली · विकासनगर, देहरादून
गुरु भजन

सतिगुरु सिख की करै प्रतिपाल

सलोकु ॥

सति पुरखु जिनि जानिआ सतिगुरु तिस का नाउ ॥

तिस कै संगि सिखु उधरै नानक हरि गुन गाउ ॥१॥

असटपदी ॥

सतिगुरु सिख की करै प्रतिपाल ॥

सेवक कउ गुरु सदा दइआल ॥

सिख की गुरु दुरमति मलु हिरै ॥

गुर बचनी हरि नामु उचरै ॥

सतिगुरु सिख के बंधन काटै ॥

गुर का सिखु बिकार ते हाटै ॥

सतिगुरु सिख कउ नाम धनु देइ ॥

गुर का सिखु वडभागी हे ॥

सतिगुरु सिख का हलतु पलतु सवारै ॥

नानक सतिगुरु सिख कउ जीअ नालि समारै ॥१॥

स्रोत: पंजाबी गुरु-वाणी · देवनागरी लिप्यंतरण · सार्वजनिक सम्पदा