श्री रामायण मन्दिरमाधवबाड़ी, बरेली · विकासनगर, देहरादून
गुरु भजन

गुरु पउड़ी बेड़ी गुरू

सिरीरागु महला १ ॥

गुणवंती गुण वीथरै अउगुणवंती झूरि ॥

जे लोड़हि वरु कामणी नह मिलीऐ पिर कूरि ॥

ना बेड़ी ना तुलहड़ा ना पाईऐ पिरु दूरि ॥१॥

मेरे ठाकुर पूरै तखति अडोलु ॥

गुरमुखि पूरा जे करे पाईऐ साचु अतोलु ॥१॥ रहाउ ॥

प्रभु हरिमंदरु सोहणा तिसु महि माणक लाल ॥

मोती हीरा निरमला कंचन कोट रीसाल ॥

बिनु पउड़ी गड़ि किउ चड़उ गुर हरि धिआन निहाल ॥२॥

गुरु पउड़ी बेड़ी गुरू गुरु तुलहा हरि नाउ ॥

गुरु सरु सागरु बोहिथो गुरु तीरथु दरीआउ ॥

जे तिसु भावै ऊजली सत सरि नावण जाउ ॥३॥

पूरो पूरो आखीऐ पूरै तखति निवास ॥

पूरै थानि सुहावणै पूरै आस निरास ॥

नानक पूरा जे मिलै किउ घाटै गुण तास ॥४॥९॥

स्रोत: पंजाबी गुरु-वाणी · देवनागरी लिप्यंतरण · सार्वजनिक सम्पदा