श्री रामायण मन्दिरमाधवबाड़ी, बरेली · विकासनगर, देहरादून
गुरु भजन

जिउ मंदर कउ थामै थंमनु

जिउ मंदर कउ थामै थंमनु ॥

तिउ गुर का सबदु मनहि असथंमनु ॥

जिउ पाखाणु नाव चड़ि तरै ॥

प्राणी गुर चरण लगतु निसतरै ॥

जिउ अंधकार दीपक परगासु ॥

गुर दरसनु देखि मनि होइ बिगासु ॥

जिउ महा उदिआन महि मारगु पावै ॥

तिउ साधू संगि मिलि जोति प्रगटावै ॥

तिन संतन की बाछउ धूरि ॥

नानक की हरि लोचा पूरि ॥३॥

स्रोत: पंजाबी गुरु-वाणी · देवनागरी लिप्यंतरण · सार्वजनिक सम्पदा