श्री रामायण मन्दिरमाधवबाड़ी, बरेली · विकासनगर, देहरादून
गुरु भजन

हउ सतगुर सेवी आपणा

सिरीरागु महला 3 घरु 1 ॥

हउ सतिगुरु सेवी आपणा इक मनि इक चिति भाइ ॥

सतिगुरु मन कामना तीरथु है जिस नो देइ बुझाइ ॥

मन चिंदिआ वरु पावणा जो इछै सो फलु पाइ ॥1॥

जिनी गुरमुखि चाखिआ सहजे रहे समाइ ॥1॥ रहाउ ॥

जिनी सतिगुरु सेविआ तिनी पाइआ नामु निधानु ॥

अंतरि हरि रसु रवि रहिआ चूका मनि अभिमानु ॥

हिरदै कमलु प्रगासिआ लागा सहजि धिआनु ॥

मनु निरमलु हरि रवि रहिआ पाइआ दरगहि मानु ॥2॥

सतिगुरु सेवनि आपणा ते विरले संसारि ॥

हउमै ममता मारि कै हरि राखिआ उर धारि ॥

हउ तिन कै बलिहारणै जिना नामे लगा पिआरु ॥

सेई सुखीए चहु जुगी जिना नामु अखुटु अपारु ॥3॥

गुर मिलिऐ नामु पाईऐ चूकै मोह पिआस ॥

हरि सेती मनु रवि रहिआ घर ही माहि उदासु ॥

जिना हरि का सादु आइआ हउ तिन बलिहारै जासु ॥

नानक नदरी पाईऐ सचु नामु गुणतासु ॥4॥1॥34॥

पंजाबी गुरु-वाणी · देवनागरी लिप्यंतरण · सार्वजनिक सम्पदा