श्री रामायण मन्दिरमाधवबाड़ी, बरेली · विकासनगर, देहरादून
गुरु भजन

मीराबाई : गुरु-भजन

(राग धानी)

मोहि लागी लगन गुरुचरणन की।

चरण बिना कछुवै नाहिं भावै, जगमाया सब सपननकी॥

भौसागर सब सूख गयो है, फिकर नाहिं मोहि तरननकी।

मीरा के प्रभु गिरधर नागर आस वही गुरू सरननकी॥

(राग धानी)

री, मेरे पार निकस गया सतगुर मार्‌या तीर।

बिरह-भाल लगी उर अंदर, व्याकुल भया सरीर॥

इत उत चित्त चलै नहिं कबहूं, डारी प्रेम-जंजीर।

कै जाणै मेरो प्रीतम प्यारो, और न जाणै पीर॥

कहा करूं मेरों बस नहिं सजनी, नैन झरत दोउ नीर।

मीरा कहै प्रभु तुम मिलियां बिन प्राण धरत नहिं धीर॥

स्रोत: मीराबाई · सार्वजनिक सम्पदा