श्री रामायण मन्दिरShri Ramayan Mandir — Bareilly | Vikasnagar

भूख लगने पर किसी से कुछ माँग कर खा लिया और प्यास लगने पर किसी बावड़ी, तालाब से पानी पीकर तुलसी इधर-उधर सो जाते।

तुलसी चरित (कथा)

भूख लगने पर किसी से कुछ माँग कर खा लिया और प्यास लगने पर किसी बावड़ी, तालाब से पानी पीकर तुलसी इधर-उधर सो जाते। इस प्रकार चलते-चलते तुलसी तीर्थराज प्रयाग आ पहुँचे। प्रयाग पहुँच तुलसी ने गृहस्थ वेष त्याग विरक्त वेष अपना लिया।

करे एक रघुनाथ संग, बाँध जटा सिर केश।
हम तो चाखा प्रेम रस, पत्नी के उपदेश।।

कुछ समय तक प्रयाग में रहकर तुलसी तीर्थाटन का निश्चय कर निकल पड़े। तीर्थों में घूमते-घूमते 'मानसरोवर' जा पहुँचे। वहाँ काकभुशुण्डि जी के दर्शन कर लौटते हुये तीर्थों में होते हुए तुलसी शिव नगर-काशी-आ पहुँचे।

तुलसी का काफी समय अब राम के ध्यान में बीतता है। जब अधिक विचलित हो जाते तो हाथ जोड़ हनुमान जी से विनती करने लगते — "हे संकट मोचक! हे हनुमान जी! मैं आपकी शरण में हूँ। राम भक्ति में बाधक बनने वाले इन विकारों को मुझसे दूर रखें प्रभु!" समय बीतता रहा। तुलसी की भक्ति दृढ़ होती रही। वैराग्य पुष्ट होता रहा। पवनपुत्र की निष्काम सेवा ने उन्हें दिशा दिखायी। कुछ समय पश्चात हनुमान जी ने उन्हें साक्षात् दर्शन दिये।

हनुमान जी के दर्शनों से कृतकृत्य तुलसी ने उनसे श्रीराम दर्शन कराने की प्रार्थना की। हनुमान जी ने उन्हें चित्रकूट चलने के लिए कहा। राम-राम जपते तुलसी चित्रकूट पहुँचे। चित्रकूट की पर्वत मालायें, सघन वन प्रदेश और मन्दाकिनी की पवित्र धारा और शान्त वातावरण में तुलसी को राम भक्ति दृढ़ करने का पर्याप्त अवसर मिला।

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