दो वर्ष सात माह छब्बीस दिन पश्चात आज राम विवाह के दिन श्रीराम चरित मानस के सातों काण्ड पूर्ण हो गये हैं। तुलसी बाबा अत्यन्त प्रसन्न हैं। भक्ति, निष्ठा, वैराग्य और समर्पण का चतुष्टय संगम एक अनुपम काव्य-कृति के रूप में सामने है। किन्तु तुलसीदास जानते हैं कि यह महाकाव्य उनको माध्यम बना स्वयं हनुमान जी ने रचा है। उनकी भूमिका केवल इतनी है कि वे राम जी के दास हैं और हनुमान जी के शिष्य। कुछ समय तक अयोध्या में स्वरचित रामायण की कथाओं के प्रसंग और चौपाइयों दोहों से उन्होंने जन-जन को राममय कर दिया। अपने धन्धों को चोट पहुँचती देख पण्डे उन्हें बार-बार कष्ट देते रहे। कुछ समय बाद त्रस्त तुलसी काशी चले आये।