श्री रामायण मन्दिरमाधवबाड़ी, बरेली · विकासनगर, देहरादून
कवितावली · गोस्वामी तुलसीदास

किष्किन्धाकाण्ड

कवितावली · किष्किन्धाकाण्ड
छंद २५

समुद्रोल्लङ्घन

जब अङ्गदादिनकी मति-गति मंद भई,

पवनके पूतको न कूदिबेको पलु गो।

साहसी ह्वै सैलपर सहसा सकेलि आइ,

चितवत चहूँ ओर, औरनि को कलु गो॥

'तुलसी' रसातलको निकसि सलिलु आयो,

कोलु कलमल्यो, अहि-कमठको बलु गो।

चारिहू चरनके चपेट चाँपेँ चिपिटि गो,

उचकें उचकि चारि अंगुल अचलु गो॥