श्री रामायण मन्दिरमाधवबाड़ी, बरेली · विकासनगर, देहरादून
विनय पत्रिका

पद 101

जाउँ कहाँ तजि चरन तुम्हारे।

काको नाम पतित-पावन जग, केहि अति दीन पियारे ॥ 1 ॥

कौने देव बराइ बिरद-हित, हठि हठि अधम उधारे।

खग,मृग,ब्याध,पषान,बिटप जड़, जवन कवन सुर तारे ॥ 2 ॥

देव,दनुज,मुनि,नाग,मनुज सब, माया-बिबस बिचारे।

तिनके हाथ दासतुलसी प्रभु, कहा अपनपौ हारे ॥ 3 ॥