श्री रामायण मन्दिरमाधवबाड़ी, बरेली · विकासनगर, देहरादून
विनय पत्रिका

पद १०१

श्रीराम-स्तुति · पद १०१ / २७९

जाउँ कहाँ तजि चरन तुम्हारे।

काको नाम पतित-पावन जग, केहि अति दीन पियारे ॥ १ ॥

कौने देव बराइ बिरद-हित, हठि हठि अधम उधारे।

खग,मृग,ब्याध,पषान,बिटप जड़, जवन कवन सुर तारे ॥ २ ॥

देव,दनुज,मुनि,नाग,मनुज सब, माया-बिबस बिचारे।

तिनके हाथ दासतुलसी प्रभु, कहा अपनपौ हारे ॥ ३ ॥