श्री रामायण मन्दिरमाधवबाड़ी, बरेली · विकासनगर, देहरादून
विनय पत्रिका

पद १०२

श्रीराम-स्तुति · पद १०२ / २७९

हरि! तुम बहुत अनुग्रह कीन्हो।

साधन-धाम बिबुध दुरलभ तनु, मोहि कृपा करि दीन्हों ॥ १ ॥

कोटिहुँ मुख कहि जात न प्रभुके , एक एक उपकार।

तदपि नाथ कछु और माँगिहौं, दीजै परम उदार ॥ २ ॥

बिषय-बारि मन-मीन भिन्न नहिं होत कबहुँ पल एक।

ताते सहौं बिपति अति दारुन, जनमत जोनि अनेक ॥ ३ ॥

कृपा-डोरि बनसी पद अंकुस, परम प्रेम-मृदु-चारो।

एहि बिधि बेधि हरहु मेरो दुख, कौतुक राम तिहारो ॥ ४ ॥

हैं श्रुति-बिदित उपाय सकल सुर, केहि केहि दीन निहोरै।

तुलसिदास येहि जीव मोह-रजु, जेहि बाँध्यो सोइ छोरै ॥ ५ ॥