पद 107
श्रीराम-स्तुति · राग ——— · बिलावल · पद 107 / 279
है नीको मेरो देवता कोसलपति राम।
सुभग सरोरुह लोचन, सुठि सुंदर स्याम ॥ 1 ॥
सिय-समेत सोहत सदा छबि अमित अनंग।
भुज बिसाल सर धनु धरे, कटि चारु निषंग ॥ 2 ॥
बलिलपूजा चाहत नहीं, चाहत एक प्रीति।
सुमिरत ही मानै भलो, पावन सब रीति ॥ 3 ॥
देहि सकल सुख,दुख दहै, आरत-जन-बंधु।
गुन गहि, अघ-औगुन हरै, अस करुनासिंधु ॥ 4 ॥
देस-काल-पूरन सदा बद बेद पुरान।
सबको प्रभु,सबमें बसै,सबकी गति जान ॥ 5 ॥
को करि कोटिक कामना, पूजै बहु देव।
तुलसिदास तेहि सेइये, संकर जेहि सेव ॥ 6 ॥