श्री रामायण मन्दिरमाधवबाड़ी, बरेली · विकासनगर, देहरादून
विनय पत्रिका

पद 108

बीर महा अवराधिये, साधे सिधि होय।

सकल काम पूरन करै, जाने सब कोय ॥ 1 ॥

बेगि,बिलंब न कीजिये लीजै उपदेस।

बीज महा मंत्र जपिये सोई, जो जपत महेस ॥ 2 ॥

प्रेम-बारि-तरपन भलो, घृत सहज सनेहु।

संसय-समिध, अगिनि छमा, ममता-बलि देहु ॥ 3 ॥

अघ-उचाटि, मन बस करै, मारै मद मार।

आकरषै सुख-संपदा-संतोष-बिचार ॥ 4 ॥

जिन्ह यहि भाँति भजन कियो, मिले रघुपति ताहि।

तुलसिदास प्रभुपथ चढ्यौ, जौ लेहु निबाहि ॥ 5 ॥