पद १०८
श्रीराम-स्तुति · पद १०८ / २७९
बीर महा अवराधिये, साधे सिधि होय।
सकल काम पूरन करै, जाने सब कोय ॥ १ ॥
बेगि,बिलंब न कीजिये लीजै उपदेस।
बीज महा मंत्र जपिये सोई, जो जपत महेस ॥ २ ॥
प्रेम-बारि-तरपन भलो, घृत सहज सनेहु।
संसय-समिध, अगिनि छमा, ममता-बलि देहु ॥ ३ ॥
अघ-उचाटि, मन बस करै, मारै मद मार।
आकरषै सुख-संपदा-संतोष-बिचार ॥ ४ ॥
जिन्ह यहि भाँति भजन कियो, मिले रघुपति ताहि।
तुलसिदास प्रभुपथ चढ्यौ, जौ लेहु निबाहि ॥ ५ ॥