श्री रामायण मन्दिरमाधवबाड़ी, बरेली · विकासनगर, देहरादून
विनय पत्रिका

पद ११४

श्रीराम-स्तुति · पद ११४ / २७९

माधव! मो समान जग माहीं।

सब बिधि हीन,मलीन,दीन अति, लीन-बिषय कोउ नाहीं ॥ १ ॥

तुम सम हेतुरहित कृपालु आरत-हित ईस न त्यागी।

मैं दुख-सोक-बिकल कृपालु! केहि कारन दया न लागी ॥ २ ॥

नाहिंन कछु औगुन तुम्हार, अपराध मोर मैं माना।

ग्यान-भवन तनु दियेहु नाथ, सोउ पाय न मैं प्रभु जाना ॥ ३ ॥

बेनु करील,श्रीखंड बसंतहि दूषन मृषा लगावै।

सार-रहित हत-भाग्य सुरभि, पल्लव सो कहु किमि पावै ॥ ४ ॥

सब प्रकार मैं कठिन,मृदुल हरि,दृढ़ बिचार जिय मोरे।

तुलसिदास प्रभु मोह-सृंखला, छुटिहि तुम्हारे छोरे ॥ ५ ॥