श्री रामायण मन्दिरमाधवबाड़ी, बरेली · विकासनगर, देहरादून
विनय पत्रिका

पद 115

माधव! मोह-फाँस क्यों टूटै।

बाहिर कोटि उपाय करिय, अभ्यंतर ग्रन्थि न छूटै ॥ 1 ॥

घृतपूरन कराह अंतरगत ससि-प्रतिबिंब दिखावै।

ईंधन अनल लगाय कलपसत, औटत नास न पावै ॥ 2 ॥

तरु-कोटर महँ बस बिहंग तरु काटे मरै न जैसे।

साधन करिय बिचार-हीन मन सुद्ध होइ नहिं तैसे ॥ 3 ॥

अंतर मलिन बिषय मन अति, तन पावन करिय पखारे।

मरइ न उरग अनेक जतन बलमीकि बिबिध बिधि मारे ॥ 4 ॥

तुलसिदास हरि-गुरु-करुना बिनु बिमल बिबेक न होई।

बिनु बिबेक संसार-घोर-निधि पार न पावै कोई ॥ 5 ॥