पद 125
श्रीराम-स्तुति · पद 125 / 279
मै केहि कहौं बिपति अति भारी। श्रीरघुबीर धीर हितकारी ॥ 1 ॥
मम हृदय भवन प्रभु तोरा। तहँ बसे आइ बहु चोरा ॥ 2 ॥
अति कठिन करहिं बरजोरा। मानहिं नहिं बिनय निहोरा ॥ 3 ॥
तम,मोह,लोभ,अहँकारा। मद,क्रोध,बोध-रिपु मारा ॥ 4 ॥
अति करहिं उपद्रव नाथा। मरदहिं मोहि जानि अनाथा ॥ 5 ॥
मैं एक,अमित बटपारा। कोउ सुनै न मोर पुकारा ॥ 6 ॥
भागेहु नहिं नाथ! उबारा। रघुनायक, करहुँ सँभारा ॥ 7 ॥
कह तुलसिदास सुनु रामा। लूटहिं तसकर तव धामा ॥ 8 ॥
चिंता यह मोहिं अपारा। अपजस नहिं होइ तुम्हारा ॥ 9 ॥