श्री रामायण मन्दिरमाधवबाड़ी, बरेली · विकासनगर, देहरादून
विनय पत्रिका

पद 125

मै केहि कहौं बिपति अति भारी। श्रीरघुबीर धीर हितकारी ॥ 1 ॥

मम हृदय भवन प्रभु तोरा। तहँ बसे आइ बहु चोरा ॥ 2 ॥

अति कठिन करहिं बरजोरा। मानहिं नहिं बिनय निहोरा ॥ 3 ॥

तम,मोह,लोभ,अहँकारा। मद,क्रोध,बोध-रिपु मारा ॥ 4 ॥

अति करहिं उपद्रव नाथा। मरदहिं मोहि जानि अनाथा ॥ 5 ॥

मैं एक,अमित बटपारा। कोउ सुनै न मोर पुकारा ॥ 6 ॥

भागेहु नहिं नाथ! उबारा। रघुनायक, करहुँ सँभारा ॥ 7 ॥

कह तुलसिदास सुनु रामा। लूटहिं तसकर तव धामा ॥ 8 ॥

चिंता यह मोहिं अपारा। अपजस नहिं होइ तुम्हारा ॥ 9 ॥