श्री रामायण मन्दिरमाधवबाड़ी, बरेली · विकासनगर, देहरादून
विनय पत्रिका

पद 126

मन मेरे,मानहि सिख मेरी। जो निजु भगति चहै हरि केरी ॥ 1 ॥

उर आनहि प्रभु-कृत हित जेते। सेवहि ते जे अपनपौ चेते ॥ 2 ॥

दुख-सुख अरु अपमान-बड़ाई। सब सम लेखहि बिपति बिहाई ॥ 3 ॥

सुनु सठ काल-ग्रसित यह देही। जनि तेहि लागि बिदूषहि केही ॥ 4 ॥

तुलसिदास बिनु असि मति आयै। मिलहिं न राम कपट-लौ लाये ॥ 5 ॥