पद 128
श्रीराम-स्तुति · पद 128 / 279
सुमिरु सनेह-सहित सीतापति। रामचरन तजि नहिंन आनि गति ॥ 1 ॥
जप,तप,तीरथ,जोग समाधी। कलिमत बिकल,न कछु निरुपाधी ॥ 2 ॥
करतहुँ सुकृत न पाप सिराहीं। रकतबीज जिमि बाढ़त जाहीं ॥ 3 ॥
हरति एक अघ-असुर-जालिका। तुलसिदास प्रभु-कृपा-कालिका ॥ 4 ॥