श्री रामायण मन्दिरमाधवबाड़ी, बरेली · विकासनगर, देहरादून
विनय पत्रिका

पद 128

सुमिरु सनेह-सहित सीतापति। रामचरन तजि नहिंन आनि गति ॥ 1 ॥

जप,तप,तीरथ,जोग समाधी। कलिमत बिकल,न कछु निरुपाधी ॥ 2 ॥

करतहुँ सुकृत न पाप सिराहीं। रकतबीज जिमि बाढ़त जाहीं ॥ 3 ॥

हरति एक अघ-असुर-जालिका। तुलसिदास प्रभु-कृपा-कालिका ॥ 4 ॥