श्री रामायण मन्दिरमाधवबाड़ी, बरेली · विकासनगर, देहरादून
विनय पत्रिका

पद 131

पावन प्रेम राम-चरन-कमल जनम लाहु परम।

रामनाम लेत होत, सुलभ सकल धरम ॥ 1 ॥

जोग,मख,बिबेक,बिरत,बेद-बिदित करम।

करिबे कहँ कटु कठोर, सुनत मधुर,नरम ॥ 2 ॥

तुलसी सुनि, जानि-बूझि, भूलहि जनि भरम।

तेहि प्रभुको होहि, जाहि सब ही की सरम ॥ 3 ॥