पद १३१
श्रीराम-स्तुति · पद १३१ / २७९
पावन प्रेम राम-चरन-कमल जनम लाहु परम।
रामनाम लेत होत, सुलभ सकल धरम ॥ १ ॥
जोग,मख,बिबेक,बिरत,बेद-बिदित करम।
करिबे कहँ कटु कठोर, सुनत मधुर,नरम ॥ २ ॥
तुलसी सुनि, जानि-बूझि, भूलहि जनि भरम।
तेहि प्रभुको होहि, जाहि सब ही की सरम ॥ ३ ॥