श्री रामायण मन्दिरमाधवबाड़ी, बरेली · विकासनगर, देहरादून
विनय पत्रिका

पद १४६

श्रीराम-स्तुति · पद १४६ / २७९

हौं सब बिधि राम, रावरो चाहत भयो चेरो।

ठौर ठौर साहबी होत है, ख्याल काल कलि केरो ॥ १ ॥

काल-करम-इंद्रिय,बिषय गाहकगन घेरो।

हौं न कबूलत, बाँधि कै मोल करत करेरो ॥ २ ॥

बंदि-छोर तेरो नाम है, बिरुदैत बड़ेरो।

मैं कह्यो, तब छल-प्रीति कै माँगे उर डेरो ॥ ३ ॥

नाम-ओट अब लगि बच्यो मलजुग जग जेरो।

अब गरीब जन पोषिये पाइबो न हेरो ॥ ४ ॥

जेहि कौतुक बक/खग स्वानको प्रभु न्याव निबेरो।

तेहि कौतुक कहिये कृपालु! ’तुलसी है मेरो’ ॥ ५ ॥