पद 155
श्रीराम-स्तुति · पद 155 / 279
बिस्वास एक राम-नामको ।
मानत नहि परतीति अनत ऐसोइ सुभाव मन बामको ॥ 1 ॥
पढिबो पर्यो न छठी छ मत रिगु जजुर अथर्वन सामको ।
ब्रत तीरथ तप सुनि सहमत पचि मरै करै तन छाम को ? ॥ 2 ॥
करम-जाल कलिकाल कठिन आधीन सुसाधित दामको ।
ग्यान बिराग जोग जप तप, भय लोभ मोह कोह कामको ॥ 3 ॥
सब दिन सब लायक भव गायक रघुनायक गुन-ग्रामको ।
बैठे नाम-कामतरु-तर डर कौन घोर घन घामको ॥ 4 ॥
को जानै को जैहै जमपुर को सुरपुर पर धामको ।
तुलसिहिं बहुत भलो लागत जग जीवन रामगुलामको ॥ 5 ॥