पद 156
श्रीराम-स्तुति · पद 156 / 279
कलि नाम कामतरु रामको ।
दलनिहार दारिद दुकाल दुख, दोष घोर घन घामको ॥ 1 ॥
नाम लेत दाहिनो होत मन,बाम बिधाता बामको ।
कहत मुनीस महेस महातम,उलटे सूधे नामको ॥ 2 ॥
भलो लोक-परलोक तासु जाके बल ललित-ललामको ।
तुलसी जग जानियत नामते सोच न कूच मुकामको ॥ 3 ॥