श्री रामायण मन्दिरमाधवबाड़ी, बरेली · विकासनगर, देहरादून
विनय पत्रिका

पद 156

कलि नाम कामतरु रामको ।

दलनिहार दारिद दुकाल दुख, दोष घोर घन घामको ॥ 1 ॥

नाम लेत दाहिनो होत मन,बाम बिधाता बामको ।

कहत मुनीस महेस महातम,उलटे सूधे नामको ॥ 2 ॥

भलो लोक-परलोक तासु जाके बल ललित-ललामको ।

तुलसी जग जानियत नामते सोच न कूच मुकामको ॥ 3 ॥