पद १५९
श्रीराम-स्तुति · पद १५९ / २७९
है प्रभु ! मेरोई सब दोसु ।
सीलसींधु कृपालु नाथ अनाथ आरत-पोसु ॥ १ ॥
बेष बचन बिराग मन अघ अवगुननिको कोसु ।
राम प्रीती प्रतीति पोली, कपट-करतब ठोसु ॥ २ ॥
राग-रंग कुसंग ही सों, साधु-संगति रोसु ।
चहत केहरि-जसहिं सेइ सृगाल ज्यों खरगोसु ॥ ३ ॥
संभु-सिखवन रसन हूँ नित राम-नामहिं घोसु ।
दंभहू कलि नाम कुंभज सोच-सागर-सोसु ॥ ४ ॥
मोद-मंगल-मूल अति अनुकूल निज निरजोसु ।
रामनाम प्रभाव सुनि तुलसिहुँ परम परितोसु ॥ ५ ॥