पद १६९
श्रीराम-स्तुति · पद १६९ / २७९
जो मोही राम लागते मीठे।
तौ नवरस षटरस-रस अनरस ह्वे जाते सब सीठे ॥ १ ॥
बंचक बिषय बिबिध तनु धरि अनुभवे सुने अरु डीठे।
यह जानत हौं हृदय आपने सपने न अघाइ उबीठे ॥ २ ॥
तुलसिदास प्रभु सों एहि बल बचन कहत अति ढीठे।
नामकी लाज राम करुनाकर केहि न दिये कर चीठे ॥ ३ ॥