श्री रामायण मन्दिरमाधवबाड़ी, बरेली · विकासनगर, देहरादून
विनय पत्रिका

पद १८३

श्रीराम-स्तुति · राग आसावरी · पद १८३ / २७९

राम! प्रीतिकी रीति आप नीके जनियत है।

बड़े की बड़ाई, छोटे की छोटाई दूरि करै,

ऐसी बिरुदावली, बलि, बेद मनियत है ॥ १ ॥

गीधको कियो सराध, भीलनीको खायो फल,

सोऊ साधु-सभा भलीभाँति भनियत है।

रावरे आदरे लोक बेद हूँ आदरियत,

जोग ग्यान हूँ तें गरू गनियत है ॥ २ ॥

प्रभुकी कृपा कृपालु! कठिन कलि हूँ काल,

महिमा समुझि उर अनियत है।

तुलसी पराये बस भये रस अनरस,

दीनबंधु! द्वारे हठ ठनियत है ॥ ३ ॥