श्री रामायण मन्दिरमाधवबाड़ी, बरेली · विकासनगर, देहरादून
विनय पत्रिका

पद १९२

श्रीराम-स्तुति · पद १९२ / २७९

जो पै जानकिनाथ सों नातो नेहु न नीच।

स्वारथ-परमारथ कहा, कलि कुटिल बिगोयो बीच ॥ १ ॥

धरम बरन आश्रमनिके पैयत पोथिही पुरान।

करतब बिनु बेष देखिये, ज्यों सरीर बिनु प्रान ॥ २ ॥

बिहित

बेद—–साधन सबै, सुनियत दायक फल चारि।

बिदित

राम प्रेम बिनु जानिबो जैसे सर-सरिता बिनु बारि ॥ ३ ॥

नाना पथ निरबानके , नाना बिधान बहु भाँति।

तुलसी तू मेरे कहे जपु राम-नाम दिन-राति ॥ ४ ॥