श्री रामायण मन्दिरमाधवबाड़ी, बरेली · विकासनगर, देहरादून
विनय पत्रिका

पद 195

बलि जाउँ हौं राम गुसाईं।कीजे कृपा आपनी नाईं ॥ 1 ॥

परमारथ सुरपुर-साधन सब स्वारथ सुखद भलाई।

कलि सकोप लोपी सुचाल, निज कठिन कुचाल चलाई ॥ 2 ॥

जहँ जहँ चित चितवत हित, तहँ नित नव बिषाद अधिकाई।

रुचि-भावती भभरि भागहि, समुहाहिं अमित अनभाई ॥ 3 ॥

आधि-मगन मन, ब्याधि-बिकल तन,बचन मलीन झुठाई।

एतेहुँ पर तुमसों तुलसीकी प्रभु सकल सनेह सगाई ॥ 4 ॥