श्री रामायण मन्दिरमाधवबाड़ी, बरेली · विकासनगर, देहरादून
विनय पत्रिका

पद १९८

श्रीराम-स्तुति · राग भैरवी · पद १९८ / २७९

मन पछितैहै अवसर बीते।

दुरलभ देह पाइ हरिपद भजु, करम, बचन अरु ही ते ॥ १ ॥

सहसबाहु दसबदन आदि नृप बचे न काल बलीते।

हम-हम करि धन-धाम सँवारे, अंत चले उठि रीते ॥ २ ॥

सुत बनितादि जानि स्वारथरत, न करु नेह सबही ते।

अंतहु तोहिं तजैंगे पामर! तू न तजै अबही ते ॥ ३ ॥

अब नाथहिं अनुरागु, जागु जड़, त्यागु दुरासा जी ते।

बुझे—-काम अगिनि तुलसी कहुँ, बिषय-भोग बहु घी ते ॥ ४ ॥

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