श्री रामायण मन्दिरमाधवबाड़ी, बरेली · विकासनगर, देहरादून
विनय पत्रिका

पद 212

श्रीराम-स्तुति · राग केदारा · पद 212 / 279

रघुपति बिपति-दवन।

परम कृपालु, प्रनत-प्रतिपालक, पतित-पावन ॥ 1 ॥

कूर, कुटिल, कुलहीन,दीन,अति मलिन जवन।

सुमिरत नाम राम पठये सब अपने भवन ॥ 2 ॥

गज-पिंगला-अजामिल-से खल गनै धौं कवन।

तुलसिदास प्रभु केहि न दीन्हि गति जानकी-रवन ॥ 3 ॥