श्री रामायण मन्दिरमाधवबाड़ी, बरेली · विकासनगर, देहरादून
विनय पत्रिका

पद 223

आपनो कबहुँ करि जानिहौ।

राम गरीबनिवाज राजमनि, बिरद-लाज उर आनिहौ ॥ 1 ॥

सील-सिंधु,सुंदर,सब लायक,समरथ, सदगुन-खानि हौ।

पाल्यो है,पालत,पालहुगे प्रभु, प्रनत-प्रेम पहिचानिहौ ॥ 2 ॥

बेद-पुरान कहत,जग जानत, दीनदयालु दिन-दानि हौ।

कहि आवत, बलि जाऊँ ,मनहुँ मेरी बार बिसारे बानि हौ ॥ 3 ॥

आरत-दीन-अनाथनिके हित मानत लौकिक कानि हौ।

है परिनाम भलो तुलसीको सरनागत-भय-भानि हौ ॥ 4 ॥