श्री रामायण मन्दिरमाधवबाड़ी, बरेली · विकासनगर, देहरादून
विनय पत्रिका

पद २२८

श्रीराम-स्तुति · पद २२८ / २७९

प्रिय रामनामतें जाहि न रामो।

ताको भलो कठिन कलिकालहुँ आदि-मध्य-परिनामो ॥ १ ॥

सकुचत समुझि नाम-महिमा मद-लोभ-मोह-कोह-कामो।

राम-नाम-जप-निरत सुजन पर करत छाँह घोर घामो ॥ २ ॥

नाम-प्रभाउ सही जो कहै कोउ सिला सरोरुह जामो।

जो सुनि सुमिरि भाग-भाजन भइ सुकृतसील भील-भामो ॥ ३ ॥

बालमीकि-अजामिलके कछु हुतो न साधन सामो।

उलटे पलटे नाम-महातम गुंजनि जितो ललामो ॥ ४ ॥

रामतें अधिक नाम-करतब, जेहि किये नगर-गत गामो।

भये बजाइ दाहिने जो जपि तुलसिदाससे बामो ॥ ५ ॥