श्री रामायण मन्दिरमाधवबाड़ी, बरेली · विकासनगर, देहरादून
विनय पत्रिका

पद 229

गरैगी जीह जो कहौं औरको हौं।

जानकी-जीवन! जनम-जनम जग ज्यायो तिहारेहि कौरको हौं ॥ 1 ॥

तीनि लोक, तिहुँ काल न देखत सुहृद रावरे जोरको हौं।

तुमसों कपट करि कलप-कलप कृमि ह्वेहौं नरक घोरको हौं ॥ 2 ॥

कहा भयो जो मन मिलि कलिकालहिं कियो भौंतुवा भौंरको हौं।

तुलसिदास सीतल नित यहि बल, बड़े ठेकाने ठौरको हौं ॥ 3 ॥