श्री रामायण मन्दिरमाधवबाड़ी, बरेली · विकासनगर, देहरादून
विनय पत्रिका

पद 230

अकारन को हितू और को है।

बिरद ’गरीब-निवाज’ कौनको, भौंह जासु जन जोहै ॥ 1 ॥

छोटो-बड़ो चहत सब स्वारथ, जो बिरंचि बिरचो है।

कोल कुटिल, कपि-भालु पालिबो कौन कृपालुहि सोहै ॥ 2 ॥

काको नाम अनख आलस कहें अघ अवगुननि बिछोहै।

को तुलसीसे कुसेवक संग्रह्यो, सठ सब दिन साईं द्रोहै ॥ 3 ॥