श्री रामायण मन्दिरमाधवबाड़ी, बरेली · विकासनगर, देहरादून
विनय पत्रिका

पद २३६

श्रीराम-स्तुति · पद २३६ / २७९

जो पै जिय जानकी-नाथ न जाने।

तौ सब करम-धरम श्रमदायक ऐसेइ कहत सयाने ॥ १ ॥

जे सुर, सिद्ध,मुनीस, जोगबिद बेद-पुरान बखाने।

पूजा लेत,देत पलटे सुख हानि-लाभ अनुमाने ॥ २ ॥

काको नाम धोखेहू सुमिरत पातकपुंज पराने।

बिप्र-बधिक, गज-गीध कोटि खल कौनके पेट समाने ॥ ३ ॥

मेरु-से दोष दूरि करि जनके , रेनु-से गुन उर आने।

तुलसिदास तेहि सकल आस तजि भजहि न अजहुँ अयाने ॥ ४ ॥