श्री रामायण मन्दिरमाधवबाड़ी, बरेली · विकासनगर, देहरादून
विनय पत्रिका

पद २५०

श्रीराम-स्तुति · पद २५० / २७९

तौं हौं बार बार प्रभुहि पुकारिकै खिझावतो न,

जो पै मोको होतो कहूँ ठाकुर-ठहरु।

आलसी-अभागे मोसे तैं कृपालु पाले-पोसे,

राजा मेरे राजाराम,अवध सहरु ॥ १ ॥

सेये न दिगीस,न दिनेस,न गनेस, गौरी,

हित कै न माने बिधि हरिउ न हरु।

रामनाम ही सों जोग-छेम, नेम, प्रेम-पन,

सुधा सो भरोसो एहु,दूसरो जहरु ॥ २ ॥

समाचार साथके अनाथ-नाथ! कासों कहौं,

नाथ ही के हाथ सब चोरऊ पहरु।

निज काज, सुरकाज,आरतके काज,राज!

बूझिये बिलंब कहा कहूँ न गहरु ॥ ३ ॥

रीति सुनि रावरी प्रतीति-प्रीति रावरे सों,

डरत हौं देखि कलिकालको कहरु।

कहेही बनैगी कै कहाये,बलि जाउँ,राम,

’तुलसी! तू मेरो, हारि हिये न हहरु’ ॥ ४ ॥