पद २५३
श्रीराम-स्तुति · पद २५३ / २७९
राम राखिये सरन, राखि आये सब दिन।
बिदित त्रिलोक तिहुँ काल न दयाल दूजो,
आरत-प्रनत-पाल को है प्रभु बिन ॥ १ ॥
लाले पाले,पोषे तोषे आलसी-अभागी-अघी,
नाथ! पै अनाथनिसों भये न उरिन।
स्वामी समरथ ऐसो, हौं तिहारो जै सो. तैसो,
काल-चाल हेरि होति हिये घनी घिन ॥ २ ॥
खीझि-रीझि,बिहँसि-अनख, क्यों हूँ एक बार,
’तुलसी तू मेरो’ बलि, कहियत किन?
जाहिं सूल निरमूल, होहिं सुख अनुकूल,
महाराज राम! रावरी सौं, तेहि छिन ॥ ३ ॥