श्री रामायण मन्दिरमाधवबाड़ी, बरेली · विकासनगर, देहरादून
विनय पत्रिका

पद 254

राम! रावरो नाम मेरो मातु-पितु है।

सुजन-सनेही, गुरु-साहिब, सखा-सुहृद्,

राम-नाम प्रेम-पन अबिचल बितु है ॥ 1 ॥

सतकोटि चरित अपार दधिनिधि मथि,

लियो काढ़ि वामदेव नाम-घृतु है।

नामको भरो सो. बल चारिहू फलको फल,

सुमिरिये छाड़ि छल, भलो कृतु है ॥ 2 ॥

स्वारथ-साधक, परमारथ-दायक नाम,

राम-नाम सारिखो न और हितु है।

तुलसी सुभाव कही, साँचिये परैगी सही,

सीतानाथ-नाम नित चितहूको चितु है ॥ 3 ॥