श्री रामायण मन्दिरमाधवबाड़ी, बरेली · विकासनगर, देहरादून
विनय पत्रिका

पद २५५

श्रीराम-स्तुति · पद २५५ / २७९

राम!रावरो नाम साधु-सुरतरु है।

सुमिरे त्रिबिध घाम हरत, पूरत काम,

सकल सुकृत सरसिजको सरु है ॥ १ ॥

लाभहुको लाभ, सुखहूको सुख, सरबस,

पतित-पावन, डरहूको डरु है।

नीचेहूको ऊँचेहूको, रंकहूको रावहूको,

सुलभ, सुखद आपनो-सो घरु है ॥ २ ॥

बेद हू, पुरान हू पुरारि हू पुकारि कह्यो,

नाम-प्रेम चारिफलहूको फरु है।

ऐसे राम-नाम सों न प्रीति, न प्रतीति मन,

मेरे जान, जानिबो सोई नर खरु है ॥ ३ ॥

नाम-सो न मातु-पितु, मीत-हित, बंधु-गुरु,

साहिब सुधी सुसील सुधाकरु है।

नामसों निबाह नेहु, दीनको दयालु! देहु,

दासतुलसीको, बलि, बड़ो बरु है ॥ ४ ॥