श्री रामायण मन्दिरमाधवबाड़ी, बरेली · विकासनगर, देहरादून
विनय पत्रिका

पद २५७

श्रीराम-स्तुति · पद २५७ / २७९

दीनबंधु! दूरि किये दीनको न दूसरी सरन।

आपको भले हैं सब, आपनेको कोऊ कहूँ,

सबको भलो है राम! रावरो चरन ॥ १ ॥

पाहन,पसु,पतंग,कोल,भील,निसिचर,

काँच ते कृपानिधान किये सुबरन।

दंडक-पुहुमि पाय परसि पुनीत भई,

उकठे बिटप लागे फूलन-फरन ॥ २ ॥

पतित-पावन नाम बाम हू दाहिनो, देव!

दुनी न दुसह-दुख-दूषन-दरन।

सीलसिंधु! तोसों ऊँची-नीचियौ कहत सोभा,

तोसो तुही तुलसीको आरति-हरन ॥ ३ ॥