पद २७
हनुमत-स्तुति · पद २७ / २७९
जयति मंगलागार, संसारभारापहर,वानराकारविग्रह पुरारी।
राम-रोषानल-ज्वालमाला-मिष ध्वांतर-सलभ-संहारकारी ॥ १ ॥
जयति मरुदंजनामोद-मंदिर,नतग्रीव सुग्रीव-दुखःखैकबंधो।
यातुधानोद्धत-क्रुद्ध-कालाग्निहर,सिद्ध-सुर-सज्जनानंद-सिंधो ॥ २ ॥
जयति रुद्राग्रणी,विश्व-वंद्याग्रणी, विश्वविख्यात-भट-चक्रवर्ती।
सामगाताग्रणी,कामजेताग्रणी,रामहित,रामभक्तानुवर्ती ॥ ३ ॥
जयतिसंग्रामजय, रामसंदेसहर,कौशला-कुशल-कल्याणभाषी।
राम-विरहार्क -संतप्त-भरतादि-नरनारि-शीतलकरण कल्पशाषी ॥ ४ ॥
जयति सिंहासनासीन सीतारमण,निरखि निर्भरहरण नृत्यकारी।
राम संभ्राज शोभा-सहित सर्वदा तुलसिमानस-रामपुर-विहारी ॥ ५ ॥