पद 269
श्रीराम-स्तुति · पद 269 / 279
राम कबहुँ प्रिय लागिहौ जैसे नीर मीनको?
सुख जीवन ज्यों जीवको, मनि ज्यों फनिको हित, ज्यों धन लोभ-लीनको ॥ 1 ॥
ज्यों सुभाय प्रिय लगति नागरी नागर नवीनको।
त्यों मेरे मन लालसा करिये करुनाकर! पावन प्रेम पीनको ॥ 2 ॥
मनसाको दाता कहैं श्रुति प्रभु प्रबीनको।
तुलसिदासको भावतो,बलि जाउँ दयानिधि! दीजे दान दीनको ॥ 3 ॥