श्री रामायण मन्दिरमाधवबाड़ी, बरेली · विकासनगर, देहरादून
विनय पत्रिका

पद 270

कबहुँ कृपा करि रघुबीर! मोहू चितैहो।

भलो-बुरो जन आपनो,जिय जानि दयानिधि! अवगुन अमित बितैहो ॥ 1 ॥

जनम जनम हौं मन जित्यो, अब मोहि जितैहो।

हौं सनाथ ह्वेहौ सही,तुमहू अनाथपति, जो लघुतहि न भितैहो ॥ 2 ॥

बिनय करौं अपभयहु तें, तुम्ह परम हितै हो।

तुलसिदास कासों कहै, तुमही सब मेरे,प्रभु-गुरु,मातु-पितै हो ॥ 3 ॥