पद २८
हनुमत-स्तुति · पद २८ / २७९
जयति वात-संजात,विख्यात विक्रम,बृहद्बाहु,बलबिपुल,बालधिबिसाला।
जातरूपाचलाकारविग्रह,लसल्लोम विद्युल्लता ज्वालमाला ॥ १ ॥
जयति बालार्क वर-वदन,पिंगल-नयन,कपिश-कर्कश-जटाजूटधारी।
विकट भृकुटी,वज्दशन नख,वैरि-मदमत्त-कुंजर-पुंज-कुंजरारी ॥ २ ॥
जयति भीमार्जुन-व्यालसूदन-गर्वहर, धनंजय-रथ-त्राण-केतू।
भीष्म-द्रोण-कर्णादि-पालित,कालदृक सुयोधन-चमू-निधन-हेतू ॥ ३ ॥
जयति गतराजदातार,हंतार संसार-संकट,दनुज-दर्पहारी।
ईति-अति-भीति-ग्रह-प्रेत-चौरानल-व्याधिबाधा-शमन घोर मारी ॥ ४ ॥
जयति निगमागम व्याकरण करणलिपि,काव्यकौतुक-कला-कोटि-सिंधो।
सामगायक, भक्त-कामदायक,वामदेव,श्रीराम-प्रिय-प्रेम बंधो ॥ ५ ॥
जयति घर्माशु-संदग्ध-संपाति-नवपक्ष-लोचन-दिव्य-देहदाता।
कालकलि-पापसंताप-संकुल सदा,प्रणत तुलसीदास तात-माता ॥ ६ ॥