श्री रामायण मन्दिरमाधवबाड़ी, बरेली · विकासनगर, देहरादून
विनय पत्रिका

पद 273

तुम तजि हौं कासों कहौं, और को हितु मेरे ?

दीनबंधु!सेवक,सखा,आरत,अनाथपर सहज छोह केहि केरे ॥ 1 ॥

बहुत पतित भवनिधि तरे बिनु तरि बिनु बेरे।

कृपा-कोप-सतिभायहू, धोखेहु-तिरछेहू,राम! तिहारेहि हेरे ॥ 2 ॥

जो चितवनि सौंधी लगै, चितइये सबेरे।

तुलसिदास अपनाइये, कीजै न ढील, अब जिवन-अवधि अति नेरे ॥ 3 ॥