पद २७४
श्रीराम-स्तुति · पद २७४ / २७९
जाउँ कहाँ, ठौर है कहाँ देव! दुखित-दीनको ?
को कृपालु स्वामी-सारिखो, राखे सरनागत सब अँग बल-बिहीनको ॥ १ ॥
गनिहि,गुनिहि साहिब लहै, सेवा समीचीनको।
अधम
—–अगुन आलसिनको पालिबो फबि आयो रघुनायक नवीनको ॥ २ ॥
अधन
मुखकै कहा कहौं, बिदित है जीकी प्रभु प्रबीनको।
तिहू काल, तिहु लोकमें एक टेक रावरी तुलसीसे मन मलीनको ॥ ३ ॥