श्री रामायण मन्दिरमाधवबाड़ी, बरेली · विकासनगर, देहरादून
विनय पत्रिका

पद 277

राम राय! बिनु रावरे मेरे को हितु साँचो ?

स्वामी-सहित सबसों कहौं,सुनि-गुनि बिसेषि कोउ रेख दूसरी खाँचो ॥ 1 ॥

देह-जीव-जोगके सखा मृषा टाँचन टाँचो।

किये बिचार सार कदलि ज्यों, मनि कनकसंग लघु लसत बीच बिच काँचो।2।

’बिनय-पत्रिका’ दीनकी,बापु! आपु ही बाँचो।

हिये हेरि तुलसी लिखी,सो सुभाय सही करि बहुरि पूँछिये पाँचो ॥ 3 ॥